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Thursday, 12 January 2023

नेता - अफसर और भारत l Indian Idols- Neta and IAS l Vidhayak IAS rape kand। Indian Bureaucracy





देख रहे हैं न, दोनो यार मुर्गी खोजते साथ घूमते हैं और फिर मुर्गी मार साथ खाते हैं। यही है हमारे नेताओं और अफसरों का रूप।
पहले तो सिर्फ नेताओं पर ही आक्षेप लगता था भिन्न भिन्न प्रकार के पर अफसर नजर नहीं आते थे, पर अब तो साथ निकलते हैं शिकार करने। कितनी बड़ी शक्षियत उतनी बड़ी शिकार।
ऐसा नहीं है की ये नया है, नेताओं तो अपना रूप दिखा ही चुके थे पहले और इनका रूप तो धीरे धीरे नही तेजी से निखरने लगा था।जो पहले हजारों में काम चला लेते थे वो लाखों में आ गए फिर ये करोड़ों में पहुंच गए और अब तो देशमुख साहेब जैसे नेता तो अरबों में महीने का ठेका देते हैं।
जैसे नेताओं के साथ धीरे धीरे क्रिमिनल कंधे से कंधे मिला कर चलने लगे उसी तरह हिंदुस्तान के अफसर क्यों पीछे रहते, अब तो ये भी साथ निकलते हैं और बराबर के हिस्सेदार रहते हैं, कोई भी कर्म में ,अच्छे कर्मों को छोड़ कर।
सुन रहे हैं न कोई घुस या सेवा नही पर अब जघन्य बीड़ा उठा रहे हैं,रेप नही गैंग रेप में अब तो शामिल होते हैं।
अभी अभी लेटेस्ट कांड का समाचार जो चल रहा है, पूर्व विधायक और आईएएस अफसर का जघन्य कांड जो उजागर हुआ है। ये उजागर भी इसीलिए हुआ क्यों की वकील साहिबा थी और इनके पास सब समर्थ था प्लस उनके लिए तो अब समाज में अपने और अपने बच्चे का पहचान का सवाल था वरना ये वकील साहिबा इतना हाथ पैर थोड़ी मारती।
और ये कांड कोई पहली बार और अनोखी थोड़ी ही है, कितने ही ऐसे हुए होंगें और होते रहते हैं।
आपको बताऊं, जो छोटे अफसर होते हैं वो छोटे सामानों से संतुष्ट हो जाते हैं, उनका डिमांड छोटा पैमाने का होता है, मतलब ये चलता फिरता पैसे वाले वस्तुओं से पूरा करते हैं पर ये so called बड़े अफसर,आईएएस वाले इनकी डिमांड और निगाहों का तो कोई सीमा ही नहीं है ये तो पूरे देश को अपनी जागीर और जनता को अपने जूतों तले रखते हैं।
और क्यों न रक्खे जूतों तले धूर्त नेता और मूर्ख जनता का  राज जो है।
पहले तो सिर्फ नेता ही दुर्गुणों का स्वरूप थे पर अब तो ये बड़े अफसर भी इसी रूप को अपना लिए हैं। पहले तो अफसरों में सिर्फ भ्रष्टाचार तक ही सीमित था पर अब तो ये अपना चरित्र भी लुटा रहे हैं। ये लूटने वाले अफसर अब खुद को बाजार में लुटवा रहे रहे हैं, बस सही दाम लगाने वाला हो।
और सरकार तो बस पड़ी है, इनको क्या पड़ा है, इनको तो बस गद्दी और कुर्सी मिलना चाहिए बाकी पब्लिक मरे तो मरे,पब्लिक तो मरने के लिए ही है,ऐसा ये नेता और अफसर दोनो का कहना है।
कैसी विडंबना, कहने के लिए ये सिविल सर्वेंट नाम करण है पर इनका सब काम और हावभाव सभी जनता के मालिक ही नही सुपर मालिक होती है।
अगर ये सिविल सेरवंटो का बस चलता है तो ये अपने चुने मालिकों को भी हाथ नही रखने देते हैं, और अगर अपना नही चला तो ये अपने आकाओं से समझौता कर अपनी लूट ,पैसों और इज्जत में बराबरी का हिस्सा देते हैं। 
आज फिर एक खबर आया है की एक आईपीएस मोहतरमा अपने आवास पर 44 सिपाही रखी हूई हैं अपने सेवा के लिए, झाड़ू,पोछा, कपड़ा,बच्चा, कुक और न जाने कौन कौन काम के लिए इस्तेमाल करते हैं ये अफसर।पब्लिक के पैसों पर पलने वाले ये अफसर पब्लिक के पैसों का धज्जी उड़ा देते हैं, इसके बावजूद ये पब्लिक सर्वेंट कहे जाने वाले लोग पब्लिक का काम क्या करेगें उल्टा पब्लिक का ही शोषण करते हैं, पब्लिक पर धौंस जमाते हैं और उनसे पैसा/घुस वसूलते हैं। अभी अभी एक एएसपी पद की अफसराइन एक उद्योगपति से 2 करोड़ घुस का डिमांड किया, समझ जाइए एएसपी आईपीएस का पहला पोस्टिंग होता है, तो ये हुक्मरान अपनी करतूत शुरुआत से ही शुरू कर देते हैं, आगे आगे जब पद बढ़ता है और रुतबा बढ़ता है तो समझ लीजिए ये क्या क्या करते होंगें।
अब सवाल आता है की इनकी भर्ती की पद्धति में कैसे पता चले इनके चरित्र और ईमानदारी के बारे में। इसी तरह से इन लिखित परीक्षा से ये सरकार कैसे पता लगा लेते हैं इन कैंडिडेट्स के कार्यकुशलता के बारे में। क्या केवल लिखित परीक्षा से लोगों की छमता, कार्यकुशलता, और ईमानदारी के बारे में पता चला लेंगे, इनकी बहाली होने के बाद और पोस्टिंग के बाद तो ऐसा नहीं दिखता है, चरित्र तो एक दम नहीं 100 में एक ही कैंडिडेट काबिल और ईमानदार होता होगा। 
पहले तो इनके ईमानदारी पर ही सवाल उठता था पर अब तो ये सब कुकर्म में संलिप्त रहते हैं, गैंग रेप तक में।
जितनी बड़ी पद उतनी निरंकुशता, आप समझ सकते हैं जब ये सीनियर ऑफिसर्स अपने से जूनियर को गालियां दे सकते हैं , वो भी अपने कैडर वालों से, तब ये आम जनता को क्या समझते होंगें। ये सिविल सर्वेंट सिर्फ कहने के लिए होते हैं, समाज की सेवा करने के बजाय ये समाज का शोषण ही करते है और शोषण ऐसा वैसा नही जिस तरह से भी हो सके, घुस लेकर, इज्जत लूट कर, घर पर काम करवा कर। कोई कंट्रोल नही इन पर, फिर ऐसे लोगों को बहाल ही क्यों करने का।
जब इनमे कार्यकुशलता ही नही दिखती है, ईमानदारी और चरित्र तो बहुत दूर रहता है इनसे, तब ऐसे अफसर क्यों बहाल करती है सरकार। जब ऐसे अफसरों से समाज को काम से ज्यादा नुकसान ही है तो फिर इनको रक्खा ही क्यों जाय। एकदम सही है, इतना पैसा, इतना सुख सुविधा देने के बाद भी ये जब काम करते ही नहीं और जब ये अफसर अनैतिक काम करते हैं अपने पद का दुरुपयोग कर तब ऐसी बहाली क्यों न बंद कर दिया जाय, या इसे इसीलिए चलाया जाए की कभी हमसे पहले अंग्रेज ऐसी पद्धति चलाते थे। 
सरकार ने इन्हे इतना सम्मान और पावर दिया है की वो अपने ज्वाइनिंग थोड़े ही दिन बाद बिगड़ जाते हैं। ये सिस्टम ऐसा है की शायद अच्छे कर्मों वाले कैंडिडेट्स भी बिगड़ जाएं।और ये बिगड़ते हैं सिर्फ जनता की शोषण करने के लिए ही नहीं पर अपने डिपार्टमेंट के लोगों पर भी हावी रहते हैं। एक नया एएसपी भी अपने मातहत सिपाहियों से शरीर मालिश करवाने लगता है और घर पर कपड़े और जूठे मंजवाता है, कहीं दुनिया में होगा ऐसा प्रशासन जो अपने ही प्रशासन को तंग और शोषण करे। सिर्फ नया नया नशेरी एएसपी ही नही पर शासन के  अनुभवी और लंबी नशा ले चुके डीजीपी स्तर के अफसराइन भी पूरी तरह से बिगड़ चुके होते हैं जो अपने ही कैडर के अफसरों को मां बहन की गालियां देंती हैं, सोचिए कैसी पढ़ाई और कैसी ट्रेनिंग दिया जाता है इनके व्यवस्था में जहां सिर्फ भरष्ट ही नही पर बदतमीज अफसर तैयार होते हैं, क्या ऐसा ही चरित्रहीन और गालीबाज अफसर चाहिए देश की जनता को।
क्या जरूरत है सिस्टम का जहां अफसर काम की जगह भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं और मेहनत की जगह हराम का लोगों का पैसा लेते हैं।
भाई अंग्रेज इस सिस्टम को चलाते थे ताकि वो देश और समाज पर अपना पकड़ बनाए रक्खे और इस देश का शोषण होते रहे। तो क्या हम भी ऐसी शोषण करने वाली प्रशासन पद्धति को चालू रखना है। सरकार तो कर ही रही है, वो इस
प्रशास्शनिक व्यवथा में कोई सुधार नहीं ला रही है जिसके कारण ये प्रशासन और भी निरंकुश होते गई है।
इतना ऊंचा पद और इतना सुख सुविधा सिर्फ बिना जाने और देखे हुए कैसे नए, अनजान, और नौसिखवा को दे दिया जाता है। हमारी सरकार बस पुरानी सरकार कि नीतियां को अपना लि बिना सोचे समझे। और बिना सोचे समझे किया हुआ काम को तो भुगतना ही पड़ेगा।
तो इन प्रशिक्षु के पढ़ाई के अलावा इनका काम करने की छमता और उतना ही चरित्र भी जांच लेना चाहिए तभी ऐसे पद और सुविधा उपलब्ध करनी चाहिए, इसके लिए लगातार सुपरविजन होते रहना चाहिए और उनका कार्य से संतुष्ट हो कर ही इतने ऊंचे पद पर प्रोनत्ति करना चाहिए। दिक्कत ये है की इस सिस्टम में ऊपर से नीचे वालों की योग्यता परखने वाले खुद इस लूट में शामिल होते हैं, ये खुद ही अपनी पद और गरिमा का दुरुपयोग करते हैं प्रोन्नति उनकी ही होती है जो उन्हें खुश रखते हैं और उन्हें गलत तरीके से फायदा पहुंचाते हैं। असल में सरकारी व्यवस्था में निजी नौकरियों की तरह हायर एंड फायर वाला सिस्टम नही न होता है की काम नहीं हुआ और गलती हुआ की आप बाहर हो जाइएगा।
इस हमाम में सब नगें हैं,सब पब्लिक का मेहनत का पैसा लूट में लगे हैं।