आज सेम day ka बहुत ही महंगा टिकट खरीदना पड़ा क्योंकि मेरा बड़ा भाई आज अचानक गुजर गया।
हमारे घर वो आन बन शान था। बहुत ही सुंदर और स्मार्ट हुआ करता था, पढ़ाई खेल दोनों में अपने समय में बहुत कुशल था। लेकिन आज सब छोड़ कर चले गया, विश्वास नहीं होता है। वो हमारा सब कुछ था हमारे मां बाप का रोल उसने सदा निभाया। नोकरी करते हुए उसने अपना फैक्ट्री खोला और हम सब उसी में रम गए। बहुत बढ़िया दिन गुजर रहा था लेकिन किस्मत में कुछ और लिखा था। हम ठीक ठाक ही चल रहे थे, घर भी बना लिया था, एक बच्चे का पढ़ाई भी डीयू से खत्म हो गया था। कुछ दिन और बच जाता तो हमारी पूरी नैय्या पार हो जाती, लेकिन अब आगे क्या होगा कुछ पता नहीं, हम चल पाएंगे या हम रोड पर आ जाएंगे जल्द ही पता चल जाएगा।
उसका फोटो डालने का हिम्मत नहीं हो रहा हमे।
सोचा था ठीक होने पर हम अपने पास बुलाते और खूब ख्याल रखते लेकिन मौका ही नहीं मिला क्या करें।
बचपन में वो बहुत सुंदर हुआ करता था , उसका घुंघराले बाल और कद काठी उसे बहुत सुंदर बनाता था। खेल और एथेलेटिक्स दोनों में साथी और बड़ों को टक्कर देता था, फिर एक दिन उसका एक्सीडेंट हो गए न एच पर लेकिन वहां से भी ठीक हो गया।
सोचा था इसबार सब ठीक कर दूंगा, और उसे अच्छा व्यापार कर खुश कर दूंगा लेकिन सब खत्म हो गया।
वो बेचारा मुझसे दुखी ही मर गया, उसे ऐसा लगता था कि मैं उससे नाराज रहता हूं जो उसे एक दम नहीं चाहता था लेकिन सारा दुनिया जानता था कि मैं उसे बहुत इज्जत करता हूं और अपने मां बाप सब वही था, लेकिन ऐसा कुछ दिखा नहीं पाया।
सारा दुनिया तो है ही, सब आ जा रहे हैं लेकिन वही एक गुजर गया, ऊपर वाले को समझना चाहिए था कि उसकी अभी जरूरत थी कुछ लोगों की रोजी रोटी का जरिया था, अब पता नहीं क्या होगा।
जब हम छोटे थे तो वो हमे मारता पीटता भी था, और जब बड़े हो गए तब ऐसा नहीं रहा।
घर पर मां का सबसे दुलारा बेटा था, सुंदर गुणवान होते भी वो मां को किक्चन में सहायता करता था, और मैं उतना ही बदमाश तीसरा नंबर पर था।
हमारा एक हंसता खेलता निश्चिंत वाला परिवार था।
पिताजी अपने जमाने के इंजीनियर थे जो सरकारी नौकरी छोड़ कर अर्ध सरकारी, देश का नवरत्न, में चले गए थे क्योंकि उनका बोस उनसे गलत हजारी बनवाता था जो हमारी मां बताती थी।
हम चार भाई थे जिंदगी आराम से चल रही थी, वैसे उस समय वेतन कम होने के कारण हम थोड़ी कमी में ही रहे, लेकिन में ठहरा खिलाड़ी जिसे खाने से ज्यादा खेलने में दिलचस्पी थी, लेकिन कमी तो रहती ही थी और हमें जो मिलता था हम उसी में गुजारा कर लेते थे।
इसी तरह ही जिंदगी चल रही थी फिर हमारा सबसे बड़ा भाई अचानक बीमार पड़ा जिसे ब्रेन ट्यूमर का कैसे निकला, लेकिन भाग्य वश आज से बहुत सालों पहले भी इसका ऑपरेशन से दिल्ली एम्स में इलाज हो गया
फिर कुछ उथल पुतल आया परिवार में और अंत में पिताजी रिटायर हो गए और लौट कर गांव आ गए जहां वो कुछ समय बीमार रहे फिर अपने बचे पैसों से एक शानदार घर बना कर रहने लगे, और उनकी अगली जिंदगी शांति से चलने लगी इसी बीच हम दोनों छोटे भाई भी गांव आकर अपने राज्य के राजधानी में अपने इसी छोटे भैया के सहारे एक बिज़नस शुरू किया और अब एक नई जिंदगी चलने लगी ।
सब अपने अपने जगह पर सेटल थे दोनों बड़े भाई दूसरे राज्यों में और हम अपने गांव में मां पिताजी के साथ।ये भाई भी कभी कभी गांव आया जय करता था जब घर पर हरियारी छा जाता था, और लौटने के समय मां पूछा करती थी फिर कब आएगा संजय। क्यों कि हम लोग एक ही बिजनेस में लगे थे इस लिए कभी अलगाव या दूर वाली फीलिंग्स नहीं आई।
फिर मेरी शादी हुई और मै गांव छोड़ कर राजधानी में ही किराए पर रहने लगा।
मैं अभी 3E सीट पर बैठा हूं, एक बगल खाना खा रहे हैं और दूसरी बगल मोबाइल पर शायद सिनेमा देख रहे है, आगे पीछे भी लोग है,लेकिन वो ही नहीं है, बहुत बड़ा कमी छोड़ गया हमारे लिए, क्या बताऊं।
हम कल सुबह वडोदरा पहुंचेंगे उसके घर पर, अब वहां क्या होगा कैसे रहेंगे, अब अपना कोई नहीं होगा, हमारा क्या होगा कुछ पता नहीं अभी कुछ समय और रह लेता तो हमारा कल्याण हो जाता।
पच नहीं पा रहा हैं ये कमी, ये हमारे घर की सबसे बड़ी झटका और नुकसान हुआ है, अभी तो सब अधूरा ही था, घर का किस्तें अभी बाकी थी, बेटी की पढ़ाई भी बाकी है, न जाने क्या होगा, सब अधर में है।
घर पर, गांव में सब लोग हमारे घर आए होंगे मां के पास जिनका यादाश्त कमजोर पड़ चुकी है लेकिन उन्हें ये लोग बताएंगे कि भैया नहीं रहे तो उनको कैसा लगेगा , ऐंठ के रह जाएंगी, ऐसा करना नहीं चाहिए लोगों को किसी को दर्द नहीं देना चाहिए, मैं जब घर लौटूंगा तब कभी मां से किसी भी भाई या पिताजी का चरचा नहीं करता था न करूंगा मैं कभी मां को दुख नहीं देना चाहता हूं, और ये सारी दुनिया को पता है। आज ही हम घर में मां के लिए सीढ़ी और बालकनी में स्टील का रेलिंग लगाने के लिए मिस्त्री बुलाया था लेकिन सब धरा रह गया।
अब तो दुनिया में हम स्तब्ध है, एक दम सुन पड़ चुके हैं।
आज अपनी वेदना लिखने का एक सुनहरा मौका मिला है।
मैं कोई लेखक नहीं पर मोबाइल पर ट्वीट करते करते प्लेन में नेट को बंद करने के कारण लगातार लिखे जा रहा हूं सर नीचे कर के।
लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा है जब सब हैं तो उसे भी रहन था, इसीलिए लगता है भगवान नहीं होते।
अब वो कभी हमसे बोलेगा नहीं, कभी डांटेगा , कभी हमारे घर नहीं आएगा , और कभी मां से लिपट कर नहीं मिलेगा, उन सब के बिना जिंदगी में क्या बचा।
पहले पिताजी गए, फिर सबसे बड़ा भाई गया , और आज तो जिंदगी का सबसे बड़ा झटका लगा है। कैसे सहा जाय। अब तो हम भी खानदान के बड़ों में आ गए ,किसके सामने रोएं,घुट घुट कर हैं, ये लिखने से मन थोड़ा हल्का होता है, लेकिन फिर भी उसकी कमी जिंदगी भर सताएगी।
अब क्या बताऊं जिंदगी अब फिर पहले जैसे नहीं रहेगा, अब जिंदगी भर इसी ग़म में हमें रहना होगा।
परिवार हमारा खत्म हो गया। कुछ हुआ भी नहीं और सब खत्म हो गया। अब शायद अगला जेनरेशन चले तो चले लेकिन चार भाइयों के आगे भी तो कुछ है नहीं, भाई के दो बेटियां विदेश में रहती हैं, हमारे एक बेटा एक बेटी वो तो अभी सेटल हुए भी नहीं, इनका जब परिवार होगा और अगर सब ठीक रहा तो इनकी जिंदगी चलेगी जहां हमारा कोई खास अस्तित्व नहीं रहेगा, हां अगर ये हमारा घर राजधानी वाला बचा तो बच्चे अपने मां को बहुत याद करेंगें क्योंकि उसने ही एक एक ईंट जोड़ा था उसने हम तो पैसों की टेंशन से वहां बहुत कम ही जाते थे।
अब आज कहां बे वजह इतने पैसे खर्च कर दूसरे राज्य में जा रहे है और वो भी दुःख सहने, कितना अच्छा हम शाम होते वन घर जाते थे हॉर्न मारने पर गेट खुलता था और हम गाड़ी के साथ अंदर होते, हाथ पैर नीचे ही धोखे हम ऊपर जाते और सब साथ बैठते थे चाय पीते थे पति पत्नी, इन अब को छोड़ कहां फालतू का जा रहे है, कुछ दिन और रुक जाता ।
कितना शौक से वो हमारे घर आता था और पत्नी बड़ी शौक से उसके लिए खाना बनाती थी, फिर हम उसी वक्त गांव के लिए निकल जाते थे मां को मिलने जो घंटे के सफर बाद। पता नहीं मां याद कर रो रही होगी या अब शांत हो गई होगी, फिर कल परसो या कुछ समय बाद भूल भी जाएगी।
She is about ninety but still does all her work।
सुबह उठ कर गार्डन को साफ करना पत्ते चुनना फिर थक कर सो जाना। अब हम यहां फूल पत्ती क्या लगाएंगे किसके लिए, हम भी अब जी रहे हैं तो अपने परिवार के लिए अब जिंदगी में कुछ नहीं रहा, ये एक था तो जिंदगी खुशहाल थी लेकिन अब तो ये भी नहीं रहा, अब कुछ मजा नहीं रहा।
कुछ देर हम लैंड करेंगे फिर कल सुबह उसके घर पर जायेंगें पर अब वहां क्या बचा ही।
जिंदगी में कुछ रस नहीं रहा।
कितना भी आगे मेहनत कर लें या कितने भी हम आगे सफल रहें लेकिन उसके बिना कोई मजा नहीं, क्या बताऊं मैं बहुत दुखित हूं, ऐसा नहीं होना चाहिए था।
निश्चित से अनिश्चित की ओर हमें ये हवाई जहाज ले जा रही ही, जैसे जैसे हम नजदीक जायेंगें वैसे ऐसे हमारी स्थिति दैनिए हो रही है।
शायद मुंबई नीचे है,, मारेंगे तो नहीं हम हिंदी बोलने के कारण।
अब रात भर यहीं ठहरेंगे और सुबह दुख का पहाड़ लेकर उसके पास जाएंगे जो हमारा सब थे लेकिन अब नहीं रहा।
क्या बताऊं सर उठाने का मन नहीं कर रहा। थक लगातार लिखते लिखते, अगर भगवान मिलते तो में उनसे पूछता ऐसी दुनिया क्यों बनाई उन्होंने , हम तो इसका एक अंश दुख भी नहीं दे सकते अपने लोगों को।
पापा गए, बड़ा भैया गया, अब छोटा भैया भी, अब हमारे ऊपर किसी का साया नहीं रहा हम तो अनाथ हो गए न।
फ्लाइट में कान में बहुत जोरों से दर्द हो रहा है, आजतक इतना ज्यादा नहीं हुआ, बाकी लोग तो नॉर्मल हैं, तो मेरी पत्नी को तो और तकलीफ हो रहा होगा जो दूर पीछे अपनी सीट पर बैठी ही।
आत्मा को शांति वाले मैसेजेस अच्छे नहीं लग रहे हैं, जो मोबाइल खुलते ही आने लगे हैं।
देख रहा हूं चोर उचक्के सब हैं लेकिन मेरा भाई ही गुजर गया। उसने अपने कंधों से सब जिम्मेदारियां हटा दिया और मुक्त हो गया, क्या होता कुछ दिन बाद करता।
कितना फिर आदमी था,आज भी गंगाजी में घुस कर तैरता था।
कितनी बार सूर्यनमस्कार करता था लेकिन फिर भी गुजर गया। अब कभी नहीं बोलेगा, कभी नहीं हंसेगा, कभी नहीं डांटेगा, चुप होगया एकदम से, क्या बोलें ...
रात के सवा एक बज रहे हैं, हम मुंबई एयरपोर्ट पर अपने गेट के सामने सब कोई बैठ गए हैं।
एयरपोर्ट पर सभी बातें कर रहे है, देख रहे है, खा रहे हैं, मगर अब वो कभी बातें नहीं करेगा, कभी अपने बड़ी बड़ी आँखें नहीं खोलेगा, और कुछ अब खायेगा भी नहीं, गजब है ये संसार, जो कल शाम तक ठीक होने लगा था आज अचानक क्या हुआ।अभी उमर तो कुछ हुआ भी नहीं था।
शायद सही से और सही जगह से इलाज हुआ होता तो अभी और आयु रहता और हम सब मिलते जुलते रहते।
इसकी जिंदगी खत्म हो गई, जो लव स्टोरी चला था वो भी खत्म हो गया जो अपना गोल्डन जुबली नहीं मना पाया।
रात के दो बज गए मगर कोई हरकत नहीं, सोने की भी नहीं बस सुबह का इंतेज़ार है जब फिर फ्लाइट से हम वडोदरा पहुंचेंगे।
पहले जब हम मुंबई आते थे तब हम खुशी और जवानी में एयरपोर्ट घूमते थे कि शायद को हीरो हीरोइन कब्दरशन हो जाए, जो हुआ भी था, तब बॉम्बे था और एयरपोर्ट भी एक मंजिला ही था। लेकिन अब कोई इच्छा नहीं, सब खत्म हो गया, धीरे धीरे हम भी काफी सिमट गए हैं शरीर और मन से, बहुत मुश्किल से गोदाम जाते हैं और काम करते हैं, हां लेकिन ट्विटर पर बहुत एक्टिव रहता हूं, अब इसके गुजर जाने से और भी मन टूट गया है और अब मन भी नहीं लगेगा पहले जैसे काम करने में, पहले देखें ये लोग आगे बिजनेस का क्या करते हैं।
हम इसके घर पहुंच गए है। लेकिन वो शायद मोर्चरी में है,कल उसकी बड़ी बेटी अमेरिका से पहुंचेगी उसके बाद ही कुछ होगा।
ये शानदार घर ये सुंदर शहर जिसपे वो नाज करता था अब कभी नहीं देखेगा, सब देखेंगे मगर वो नहीं।
उससे ज्यादा उमर वाले घूम रहे हैं पर वो चला गया, गजब है ये जिंदगी एक झटके में सब खत्म।
एक एक चीज अपने घर में लगाया था, अपने गार्डन तक को सुंदर से संवारता था पर अब नहीं आएगा, सब कुछ सब कोई को छोड़ कर चले गया।
इसका लॉस घर में सबसे बड़ा लॉस रहा है, उसके रहते कभी किसी का कमी नहीं लगा, पिताजी के गुजरने के समय भी, मुझे तो लगता है मेरे अपने परिवार से भी ज्यादा उसकी अहमियत थी, असल में वो बहुत स्पॉटिंग हुआ करता था हर वक्त शायद इसीलिए इतना खालीपन लग रहा है।
उसके चले जाने अब काम में कोई दिलचस्पी नहीं दिख रहा है,असल में गुजर गया बहुत जल्दी न, अभी हटा कट्टा और बहुत मिलनसार था, उमर हो जाता तो इतना नहीं अखरता जैसे पिताजी के साथ हुआ था।
क्या हम कभी इस नुकसान से उभर सकेंगें क्या, क्या बाद में हम भी शांत हो जायेंगें और सब भूल जाएंगे, सच्चाई में हम इसे भूलना नहीं चाहते हैं, मेरे साथ दिक्कत है कि मुझे अपने परिवार को भी देखने की जिम्मेदारी है, बड़ा मुश्किल समय आ गया है जिदंगी पहाड़ बन गया है, इतना न वो हम को कर दिया था कि कुछ समझते नहीं बन था है, हम लड़ते थे मगर वो हमें करता था, मैं बड़ा बेवकूफ था मुझे समझना चाहिए था कि वो एक दिन दुखित मन से गुजर जाएगा, इस बार सोचे थे बिजनेस अच्छा कर उसे खुश कर देंगे सब शुरुआत भी हुआ था मगर ये क्या हो गया।
हंसते खेलते हम सबों की जिंदगी गुजर रही थी मगर बीच में ही ये बहुत बड़ा झटका लग गया।
गला रूंध गया इसका अंतिम तस्वीर देख कर कैसे आंख बंद कर लिया और मुंह भी ये हंसमुख बोलने चलने वाला आदमी इतनी कम उम्र में, ऊपर वाले को सोचना था इसकी अभी जिंदगी थी इसके साथ हम सभी की जिंदगी थी, इससे कम में तो हम इंसान पिघल जाते हैं भगवान तो सब कुछ कर सकते थे।
और अगर उसकी जगह ऐसा ही मेरा तस्वीर वो देखता तो दहल कर खुद मरजाता इतना मानता था हमें।
इतना कष्ट मुझे कभी नहीं हुआ जितना इसका तस्वीर देख के हुआ है, अब जिंदगी में कुछ नहीं दिखता है मुझे बस वो ही वो, ऊपर वाले को कुछ तो सोचना था या है ही नहीं।
जो भी हो कभी नहीं सोचा था उसका ऐसा तस्वीर देखना भी पड़ेगा।
कितना अच्छा होता की एक बार फिर हम सब एक हो जाते और उसी तरह हंसते बोलते काम करते मिलकर, अब ये बिजनेस तो मनहूस दिख रहा है, कोई उपाय नहीं है नहीं तो कहीं शांत में जाकर दुनिया की माया को छोड़ कर रहते।
इसकी कमी कभी पूरी नहीं होगी, जब अंतिम सांस हम लेंगे तभी ये दुख भी जाएगा, पता नहीं इस दुनिया को छोड़ कर क्या फिर हम मिलेंगें, एक बार तो मिलता बातें करता, गुस्सा करता, कुछ नहीं मौन साध लिया हमे तड़पने के लिए, इतना दुख बहुत ज्यादा है ये ।इसी सब दुख से व्यथित हो कर गौतम बुध ने दुनिया त्याग दी थी!!
आज उनका शरीर आया एक दिन बाद, मै उसका चेहरा हो देखते रह रह गया, चेहरा वैसा ही खिला हुआ, हमारे लिए बहुत बड़ा सेट बैक था कि इस उमर में भी उसे बचा नहीं सके जबकि इससे बड़े हमारे चाचा बल्ड कैंसर पीड़ित आज भी चमकते हुए चलते हैं और हम हर गए। अब तो हमारे चाचा और निर्भीक हो कर हमलोगों को बगल में तंग करेंगे। ये था तो हमारे ऊपर एक छत्र छाया था, हर चीज में वो हमारे सहारा को रहता था, अब तो हम बेसहारा हो गए।
हम झगड़ थे उसकी मैने फोटो एल्बम से हटा दिया फाड़ दिया था जब उसने अपने मन से शादी की थी, उसे दुख भी हुआ होगा, फिर हम धीरे धीरे साथ हुए ऊपर नीचे सब चला लेकिन हम एक होकर चले , फिर से परिवार साथ हो गया था लेकिन अंत में जब उसे बीमारी हुई तभी से हम टूटने लगे थे, और आज उसका दाह संस्कार कर आए अब तो उसका अस्तित्व भी खत्म हो गया। बहुत गलत हो गया हम उससे बिछड़ नहीं सकते थे, वो बाते करता था हम उसे जवाब देते मगर बिछड़ना तो बहुत कठिन हो रहा है, बस मन करता है वो मिल जाए और हम उसके साथ चले जाएं और साथ रहे , शायद मेरा लगाव और उसका प्रयास हमारे लिए इतना था कि अब और कुछ नहीं सुझता है।
क्या किया जाय क्या नहीं!
हम कभी नहीं भूलेंगे उसको शायद उसी के याद में उसी के पास चले जाएं, क्या पता, मुझे पता है मैने परिवार भी बसाया है और वो मेरी प्रथम जिम्मेदारी है, अगर उसे मैं ऐसा कहूं तो वो डांट देगा , वो भी एक बार कर दे मै फिर एक बार उसका दंत खुशी खुशी सुन लूंगा, पर डांटे तो सही, ऐसे थोड़ी जाता है कोई।
आज उसके गुजरे (मरे नहीं जो कि एक घटिया स्तर का शब्द है)चौथा दिन है, सुबह के पांच बज रहे हैं, यहां अभी भी अंधेरा है, मेरा नींद पूरा होने के कारण उठ गया हूं,बाहर मै गाड़ी का हॉर्न सुन प रहा हूं लेकिन अब ये कभी गाड़ी नहीं चलाएगा, अगर चलने लायक भी नहीं होता सिर्फ बैठ कर रहता तब भी मुझे बहुत संतोष होता मै खुद उसे गाड़ी में बिठा कर यहां वहां लेजाता क्योंकि वो हमेशा बिना झिझक के मुझे बड़ी शौक से घुमाता था , उसके पास बहुत ही एनर्जी था और उसके आंख दांत सब ठीक था जो कि मेरा खराब हो गया है ऊपर से ड्राइविंग लाइसेंस भी खत्म है।
जिस दिन निकले हैं उसी दिन मैं डॉक्टर से मिल कर आँखें बनवाने का सोच रहा था जब ये सुन था कि वो ८५ परसेंट ठीक हो गया है, तब मैं आश्वस्त हुआ था कि अब रोने वाली स्थिति नहीं होगी लेकिन अचानक ये हो गया । दाह संस्कार के बाद तो सब नॉर्मल हो गया है सर से उसकी मेमोरी हटने भी लगा है मगर शांत और एकांत में फिर याद पर आँखें भर आती हैं, तब तो मैं ऑपरेशन भी नहीं करवा पाऊंगा कुछ समय तक क्यों की आंखों में पानी आना मना है शायद।
कितना अच्छा था वो यहां रहता था और मैं पटना, जिंदगी भर बाहर रहने के बाद कुछ सालों में मैं पटना को अपना लिया था , अब ऑफिस/गोदाम से शाम को घर लौटाना ही मेरे लिए दिन का सबसे अच्छा पल होता था, मैं रोज गोदाम जाता था क्योंकि काम हो या न हुआ हो एक संतुष्टि मिलती थी और खास बात ये है कि घर लौटने पर बहुत इज्जत मिलती थी। अब वापस लौटने पर मैं ऑफिस छोड़ दूंगा सिर्फ गोदाम से ही काम करूंगा , मेरा तो मन पूरा उच्चट गया है अगर कमाने का उपाय होता दूसरा तो बस अलग हो कर रहता। लेकिन मैं उसकी याद नहीं भुना चाहता हूं जो कि दिन होते ही तेजी से भूल जा रहा हूं। अब बडौदा मुझे करने को दौड़ रहा है हर रोड बिल्डिंग जैसे मुझे चिढ़ा रहा हो मेरी बेबसी पर हंस रहा हो।
मेरी इतने भावनाएं कोई नहीं समझता क्योंकि मैं एक फेल्योर आदमी रह गया , सिर्फ और सिर्फ मेरी पत्नी समझती है क्योंकि शायद शादी के बाद मैं ही उसका सब कुछ हूं, मेरी existence ही उसका अस्तित्व रहेगा क्योंकि शायद मैं ही उसका खुराक हूं शायद मैं ही उसका सुहाग हूं, हो सकता है उसका पास खुराक और सुहाग का कोई उपाय होता तो मेरी existence शायद उसके लिए मायने नहीं रहता , अब क्या करें।
यहां मुझे एक दम अच्छा नहीं लगता है ,घुटन सा लगता है, एक कोने में बैठ कर मैं ये लिखता हूं या फिर ट्विटर, रेडिट, या गूगल न्यूज,ट्वीट करना मेरा मेजर हॉबी हो गया । मेरा भी बड़ा प्रॉब्लम मै एक चीज से बहुत डीप इन्वॉल्व होता हूं और फिर एक दम से मन उच्चट भी जाता है।
1.44AM
हंसने बोलने वाला आदमी फ्रेम हो गया
हम रह लेंगें यादों में बस ये अपने जगह पर हो हमे ऐसा पता हो।
पहले इसे तड़पाते थे आज ये हमे तड़पा रहा है।
Cannot miss him moving away।
दुनिया में एक से एक दुष्ट आदमी एक दम हट्टा कट्टा ठाठ से जी रहे हैं,क्या इसी को मारना था जिससे लोग खुशी लेते थे, कम से कम ऊपर वाला हमारे बारे में तो सोचता जो न चींटी मारता है न सांप ,जिसकी एक बूढ़ी मां है, भाई हम तो सो सोचते ही हैं और वो तो भगवान ही है, दंड ही देना था तो कुछ भी दे देते, छीनते तो नहीं हमेशा के लिए। हमारी तो जिंदगी गई, एक कमजोर परिवार को संभालना भी तो था,अगर सच्ची में भगवान होता तो ऐसा नहीं करता, शायद ये दुनिया विज्ञान ही है, विज्ञान ही इस दुनिया को संभालती कंट्रोल करती है ,जो ये प्रकृति मानव जाति है सब एक छोटे से कण से उत्पन्न evolution से इतना बड़ा रूप लिए,एक टाइम तो और भी बड़ा रूप था जो बाद में नाश हो कर छोटा हो गया बस मनुष्य ही नाश होने से बचा और छोटे जीव से इतना बड़ा रूप लिया।
मेरा भाई इतना ज्ञानि इतना पढ़ाकू नहीं था वो अपना जिंदगी जीता था,भगवान ने उसे जीने के लिए दिया भी सब कुछ था। हां बचपन में बहुत होनहार था खेल तो था ही पढ़ने में भी,मुझे पता है जब उसका मैट्रिक का रिजल्ट आया था तो हमारे घर में मिठाई आया था।
किस्मत का धनी था,कभी हमलोगों की तरह कष्ट में या घुट घुट कर जिया नहीं।हंसते बोलते जिंदगी जिया। अगर हमारी भी ठाठ कभी लौटेगा तब भी मन टूट चुका होने के कारण हम खुश नहीं रह पाएंगे।
मुझे याद आता है, हमे कोई नहीं मानता था,सिर्फ वहीं मानता था,मैने जवानी में उससे नाराज रहा मुंह मोड़ा उसका दंड उसने मुझे अपना मुंह मोड़ के ली लिया,अपना जान देकर बहुत बड़ा सजा दिया, लेकिन इतना बड़ा सजा वो मुझे कभी नहीं देता, वो तो हमेशा मेरा ध्यान देता था,अपने परिवार से हाथ कर। बहुत खुश हुआ तो वो जब मेरी शादी हुई थी, बहुत खुश रहता था वो मेरी पत्नी से जो खुद उसी की तरह शौकीन ,हंसमुख,और जिंदादिल औरत है, और लगभग उसी की तरह जिंदगी जी प रही है।
इसके घर में हमे कभी मन नहीं लगता, बंधा बंधा रहता हूं, बहुत अनबोली रुकावटें हैं, इसीलिए मैं यहां कम ही आता था और आते ही लौट भी जाता था,नींद नहीं आ रही है मगर कहां जाऊं, छत पर आजतक गया भी नहीं।
लगता है पंखा चला कर फिर से सोने की कोशिश करना होगा बाहर बारिश हो रही है, वो होता तो जरूर पूछता क्या हुआ या पूछता चाय बनाऊं, कुछ भी अपना खून होने के कारण मैं भी उसके साथ हो लेता।
जानते हैं बस भगवान जी अपने साथ भी बोल करले जाते तो भी संतोष होता चलो वो यहां पर है वहां पर है, जैसे पहले हमसे दूर बड़ौदा में रहता था, ठीक उसी तरह कही और रहता बड़ौदा न सही कही दूर ही, जैसे वो दूर अमेरिका चले गया था।
लेकिन वो सो गया हमेशा के लिए, मै उसके चेहरे से ज्यादा उसके पैरों को ही देखते रहा उसके पैरों में जान थी।
अब मैं उसके चेहरे नहीं देख पता, मैं पिताजी का भी फोटो नहीं देख पाता हूं, दोनों की यादें जरूर रहती और याद आती हैं, दोनों ही चले गए, न जाने कहां चले गए, या हमेशा के लिए अस्तित्व अपना मिटा दिया इन्होंने और हमें घुट घुट कर जीने को छोड़ दिया।
Aloofnees is just terrific, whenever I happen to be alone, especially night time it becomes haunting very difficult to cope with। Probably when I reach back and start my day to day work it will come down, and probably thoughts will get erased as heard, let's see though I don't want to forget him, he was more than just blood, his afable nature and smiling talks reminds you a lot।