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Saturday, 14 January 2023

Dhol,Gavanr,shudra,pasu nari sakal tadn ke adhikari। ढोल, गंवार,शूद्र पसु ,नारी सकल ताड़न के अधिकारी

इसमें कोई गलती नही है,जो काम नहीं करेगा,जो अनुशासन में नही रहेगा और जो नासमझ है उन्हें तो शासन में रखना ही पड़ेगा। क्या कुत्ते ,बंदर या कोई भी जानवर को आप बिना शासन में रखे चैन से रख सकते हैं। तो यही बात है अगर चैन से रहना है तो कमतर जीवों को शासन में रखना होगा। ये सचाई है आपको बुरा लगे या भला।
जानते हैं इस पंक्ति पर बहुत बहस हो रहा है और ज्यादातर लोग अपनी रोटी सेंकने में लगे हैं। इन शब्दों से नाराज लोग या ये कहें अपनी रोटी सेंकने वाले लोग इसका विरोध कर कुछ लोगों को सिर्फ और सिर्फ भड़का रहे हैं। ये इस वर्ग को भड़का रहे हैं ताकि इतनी बड़ी वोट बैंक हमारी बन जाए और हम बड़ा नेता बन जाएं फिर आराम से नेतागिरी करें ,लोग हमारे आगे पीछे हों और हम बस मौज ही मौज करें, इनके अपने स्वार्थ के सिवा और कुछ नही है। ये मंत्री जी जो इसे गलत बता रहे हैं वो तो खुद गलत रास्ते पर रहे हैं। उन्हों ने अपना नाम में ही घपला किए हुए हैं, ये कभी क्रिमिनलों का सहारा लेकर नेतागिरी करते थे, और पता नही की ये प्रोफेसर सही में हैं की नही भी।
इस दोहा में जो भी सच्चाई हो तुलसीदास जी के मन में क्या था हमें नहीं पता पर इसके विरोध करने वाले सारे स्वार्थी और इसके सहारे अपनी रोटी सेंकने वाले महा स्वार्थी लोग हैं।आपकोबता दें की इसकी विरोध करने वाले सभी ने जाति का शॉर्टकट रास्ता अपनाया अपने पेट भरने के लिए तथा ऊंचा पद पाने के लिए इनमे से कोई भी सिर्फ और सिर्फ अपने मेहनत के बल पर नही उठे हैं। 
अच्छे इस सब को इस दोहे में सिर्फ एक ही शब्द से ज्यादा तकलीफ है, और इस समाज की तकलीफ बयान करते हैं, इस दोहे में तो और भी वर्गों को कोट किया गया है उन सब से क्यों सहानुभूति नहीं है क्योंकि उनका वोट बैंक बहुत छोटा है या उनको तो वोट ही नही पड़ता है, इसीलिए बाकी सब से क्या, बस अपना वोट पर ध्यान दो और उनको भड़का कर अपना उल्लू सीधा करो। जो पढ़े लिखे होते हैं वो जाति आधारित नौकरी और ऊंची पद खोजते हैं और इनमें जो अनपढ़ और क्रिमिनल प्रवृति के होते हैं वो नेतागिरी में उतरते हैं।